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तीर्थंकर जैनधर्म श्रमण संस्कृति केन्द्र महत्वपूर्ण तथ्य !

" पूजा " परम पूज्य आचार्य १०८ श्री विद्यासागर जी महाराज जी पूजा जिनवाणी पुत्र क्षुल्लक श्री ध्यानसागर जी भोपाल

जैन आगम् सर्वोपरि है। आगम निर्दोष है। यदि समझ न आए तो वह अपनी बुद्धि का दोष है ! जैनं जयतु शासनम्।

Time is the best healer भगवान पर भरोसा रखें, लेकिन भगवान भरोसे न रहे। -परम पूज्य आचार्य १०८ श्री विद्यासागर जी महाराज जी

" विशुद्ध वचनामृत " [Dictum's] PRAVACHAN PRABHA

अहिंसा से ही इस देश की पृगति संभव है "सम्पूर्ण देश अहिंसा धर्म को पहचानेगा, और जानेगा एवं आने वाले समय में शाकाहार को अपनायेगा"

आचार्य श्री विद्यासागर जी के पास आज भी वही कमण्डल है जो 47 वर्ष पूर्व उनके दीक्षा गुरु श्री ज्ञान सागर जी ने दीक्षा देते हुए प्रदान किया था

काजर लागे किरकिरो , सुरमा सहा न जाए , जिन नैनन बड़े बाबा बसे , दूजो कोन समाए...

कार्य करने से पहले गुण-दोषों काे परखना जरूरी • परम पूज्य आचार्य १०८ श्री विद्यासागर जी महाराज जी

जीवन में सदैव बनाए रखें नीति और न्याय के सिद्धांत को:#आचार्यश्री @ #सिलवानी

इसशिक्षा से अर्थ (धन) तो मिलता है, लेकिन किस कीमत पर! संबंध, इंसानियत,दयाभाव और विछोह की कीमत पर? यदि हमें उचित व स्तरीय शिक्षा देना है, तोकहीं जाना नहीं है, बस अपने इतिहास को ही खंगालना है।