Posts

महामन्त्र णमोकार अनादिनिधन मन्त्र अर्थात् यह अनादिकाल से है दु:ख में, सुख में, कदम-कदम पर णमोकार मन्त्र का जाप करना चाहिए।

जैन कर्म सिद्धांत के अनुसार, कर्म के आठ मुख्य प्रकार हैं घातिया और अघातिया

सम्पूर्ण जैन धर्म का सार

भावना योग

censusforjain.com जैन जनगणना

परम श्रद्धेय गुरुवर आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी प्रवचन संग्रह

अपराजेय साधक संयम स्वर्ण महोत्सव आचार्य श्री विद्यासागर

जैनधर्म की प्राचीनता अनादिकाल से अनन्तकाल तक विद्यमान रहने वाला जैन धर्म है। जैनम जयतु शासनं, वन्दे विद्यासागरम _/\_