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आचार्य श्री विद्यासागर जी के पास आज भी वही कमण्डल है जो 47 वर्ष पूर्व उनके दीक्षा गुरु श्री ज्ञान सागर जी ने दीक्षा देते हुए प्रदान किया था

काजर लागे किरकिरो , सुरमा सहा न जाए , जिन नैनन बड़े बाबा बसे , दूजो कोन समाए...

कार्य करने से पहले गुण-दोषों काे परखना जरूरी • परम पूज्य आचार्य १०८ श्री विद्यासागर जी महाराज जी

जीवन में सदैव बनाए रखें नीति और न्याय के सिद्धांत को:#आचार्यश्री @ #सिलवानी

इसशिक्षा से अर्थ (धन) तो मिलता है, लेकिन किस कीमत पर! संबंध, इंसानियत,दयाभाव और विछोह की कीमत पर? यदि हमें उचित व स्तरीय शिक्षा देना है, तोकहीं जाना नहीं है, बस अपने इतिहास को ही खंगालना है।

आषाढ़ से चूका किसान और डाल से छूटा बंदर दोनों की स्थिति ख़राब ही होती है इसी प्रकार समय रहते मनुष्य यदि अपने नर भव को सफल बंनाने में चूक जाता है तो उसकी भी बुरी गत होती है।

सर्दी उन्हें ही लगती है जिन्हें बुढ़ापे का डर सताता है।

आप भी यदि संग्रह करते हैं बुद्धि का एवं धन का, और वो समय पर जरूरत मंदों को बांटते रहेंगे तो वो पुण्य का कारण बन जाता है और पुण्य सद्कार्यों से ही प्रबल होता है।

भोपाल (चौक)। अहिंसा स्थली इकबाल मैदान में बन गया समोशरण जब पुज्य आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज ससंघ पधारे।

शिक्षा और भारत समापन सत्र

"अभूतपूर्व पिच्छी परिवर्तन "

कोई भी काम करने के लिए मजबूत इच्छाशक्ति की जरूरत होती है

जब कर्मों की हवा चलती है तो रातों रात जीवन की दिशा और दशा बदल जाती है।