" विद्या अमृत वाणी"

आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के रविवार 4 सितम्बर के प्रवचनों पर आधारित रचना
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रविवारीय धर्मसभा का
सुन लो भैय्या सार
दायित्व का निर्वाहन कर
सत्य करो स्वीकार।
   हिम्मत और विश्वास हो तो
   रास्ता मिल जाता है
   मजबूत कन्धों पर ही
   दायित्व का भार डाला जाता है
मत भूलो कभी
आदर्शों का उपकार
दायित्व का निर्वाहन कर
सत्य करो स्वीकार ।।।
   लोकनीति लोकसंग्रह है
   इसे लोभसंग्रह न बनाइये
   लोकतंत्र के दायित्व को
   सत्यनिष्ठा से निभाइए
प्रजा के प्रति रखें
सरल, सत्य, व्यवहार
दायित्व का निर्वाहन कर
सत्य करो स्वीकार।।
   यथा राजा यथा प्रजा
   ये व्यवस्था पुरातन है
   प्रजा को संतान समझे
   ये ही राजा का धर्म है
राजा बनकर प्रजा के
करो स्वप्न साकार
दायित्व का निर्वाहन कर
सत्य करो स्वीकार।।
   दौड़ना सीखो जीवन में पर
   दौड़ धुप में समय न गंवाओ
   धैर्य रखो जीवन में
   बस अपना कर्तव्य निभाओ
सत्याग्रह की नहीं
सत्यग्राही की महिमा अपरम्पार
दायित्व का निर्वाहन कर
सत्य करो स्वीकार।।
   राजा राम की शरणागत हुए
   लंकेश के भ्राता
   प्रजा की रक्षा के भाव से
   विभीषण ने झुकाया स्व-माथा
राम और लक्ष्मण ने उन्हें
पहनाया गले का हार
दायित्व का निर्वाहन कर
सत्य करो स्वीकार ।।।

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     【रचनाकार】
        पंकज प्रधान

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